एक गांव चंदनपुर:सब कुछ होकर भी कुछ नहीं है

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बांकुड़ा: चारों ओर जंगल से घिरा हुआ बांकुड़ा का एक गांव चन्दनपुर जिसमें १७० परिवार रहते हैं। इस गांव में सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है।नल है पर पानी नहीं,स्कुल है पर शिक्षक नहीं।

गांव के स्थानीय निवासी नंदनाथ आकुली के अनुसार उनके गांव में हर तरह की सुविधाओं की कमी है। पानी की कमी, पक्की सड़क नहीं है, सरकारी स्कुल है पर शिक्षक नहीं है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी पानीय जल की है।

गांव में एक ही नलकूप ही निवासियों का सहारा है। इस नल से पानी लेने के लिए ग्रामवासियो के बीच झगड़ा लगा ही रहता है।गांव के पास से ही जनस्वास्थ्य कारीगरी दफ्तर की साफ पानी के पाइप लाइन गई है,पर उसका पानी इस गांव तक नहीं पहुंचा। सरकारी योजनाओं के तहत गांव में नल बनाए गए हैं पर उनमें पानी नहीं आता।
कुछ साल पहले यहां के बच्चों की सुविधा के लिए एक सरकारी जूनियर हाईस्कूल का निर्माण किया गया था पर अभी भी इसमें एक भी परमानेंट टीचर नहीं है।

इतने सालों से यह विद्यालय दो गेस्ट टीचरों के द्वारा चलाया जा रहा है। यहां के गेस्ट टीचर सपन चट्टोपाध्याय ने कहा कि शुरूआत में विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक थी।पर शिक्षकों की कमी के कारण धीरे धीरे संख्या में कमी आ रही है।हम दोनों गेस्ट टीचर ही विज्ञान के शिक्षक है। हमारे लिए संस्कृत जैसे विषयों को पढ़ाना मुश्किल है। इस कारण से अभिभावक छात्रों को यहां से निकाल कर पांच किलोमीटर दूर छांदार हाई स्कूल में पढ़ने भेज रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को बार बार इसके बारे में जानकारी दी है। जंगल से घिरा होने के कारण इस गांव में हाथियों का झुंड प्राय: ही उपद्रव मचाता है। हाथियों के डर के साथ ही छोटे बच्चों को जंगल के बीच से होकर पांच किलोमीटर दूर पढ़ने जाना पड़ता है। इस बारे में वहां के डी.आई से पुछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पता है।पर जब तक स्कूल सर्विस कमीशन से परमानेंट शिक्षक का नियोग नहीं होता,वह कुछ नहीं कर सकते। अधिक से अधिक वह वहां और दो तीन गेस्ट टीचर भेजने की कोशिश कर सकते हैं।

बांकुड़ा जिला परिषद के सभाधिपति मृत्युंजय मूर्मू से पानी की किल्लत के बारे में पुछने पर उन्होंने कहा कि वह इस बात से अवगत नहीं है। इस बारे में वह बीडीओ को जानकारी दे कर जरूरी कदम उठाने के लिए कहेंगे।
बड़जोड़ा विधानसभा के विधायक सुजित चक्रवर्ती ने बताया कि उन्हें वहां की पानी की किल्लत के बारे में जानकारी है। इसके लिए उन्होंने २०१६ में वहां एक सबमर्सिबल पंप लगवाया था। पर वह जानते हैं कि उससे कुछ ही लोगों को फायदा हुआ है।सबकी परेशानी दूर नहीं हुई है। इसके लिए उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स जमा किए ।पर विरोधी दल का विधायक होने के कारण उनके किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली।

प्रशासनिक अवहेलना के बावजूद यहां के लोगों को आशा है कि उनकी असुविधाओं का जल्द ही निराकरण किया जाएगा

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