बांकुड़ा के प्राचीन शहर सोनामुखी में कार्तिक विसर्जन की धूम

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वर्षा शर्मा, बांकुड़ा: इस महीने के १७ तारीख से चार दिनों तक बांकुड़ा के सोनामुखी में भगवान कार्तिकेय की पूजा धूमधाम से मनाई गई।यहां पर भगवान कार्तिकेय की विशालकाय मूर्तियों की पूजा की जाती है।ऐसा कहा जाता है कि सोनामुखी में हर तरह की मूर्ति पूजा होती है। इसे ‘मंदिरों का शहर’ कहा जाता है।

अभी कुछ ही दिन पहले यहां के लोगों ने धूमधाम से काली पूजा का आनंद लिया। उसके बाद वह कार्तिक पूजा में मशगूल हो गए। यहां की पूजा के समान ही इनकी विसर्जन शोभायात्रा भी प्रसिद्ध है। कुछ दिनों के अंतराल में ‘काली कार्निवल’ की तरह ‘कार्तिक कार्निवल’ का साक्षी बना यह प्राचीन शहर।

प्राचीन रीति मानकर रातभर देव सेनापति कार्तिक की प्रतिमाओं के साथ हल्की मीठी ठंड में सैकड़ों लोग रास्ते पर मधूर संगीत और आतिशबाजी का आंनद उठाते रहे।

‘काली-कार्तिक के देश’नाम से प्रसिद्ध इस शहर में छोटे-बड़े मिलाकर प्राय दो सौ कार्तिक प्रतिमाओं की पूजा होती है। लेकिन शोभायात्रा निकालकर विसर्जन की अनुमति केवल चालीस पूजा कमिटियों को ही मिलती है।
सम्पूर्ण राज्य में कार्तिक संक्रांति के दिन केवल एक दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है।

परन्तु सोनामुखी में यह पूजा चार दिनों तक चलती है।पांचवें दिन शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है। प्रशासन द्वारा निर्धारित रूट पर प्रतिमाओं के साथ शहर-परिक्रमा करते हैं लोग। इस साल भी बुधवार को रातभर शोभायात्रा के बाद गुरूवार को एक-एक कर प्रतिमाओं का विसर्जन शुरूकिया गया जो शाम तक चला।

बुधवार शाम को साढ़े छह बजे प्रशासन के द्वारा बनाए गए सूची के अनुसार शहर के चौराहे पर सर्वप्रथम लाया गया बाउरी पाड़ा कार्तिक को। इसके बाद एक-एक कर शिशु कार्तिक, बडा़ कार्तिक,माईतो कार्तिक सहित करीब ४० प्रतिमाएं। इस कार्निवल को देखने हेतु दूर-दूर से लोग आते हैं। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा। किसी भी परिस्थिति कि मुकाबला करने के लिए प्रशासन तैयार थी।कई एम्बूलैंस भी मौजूद रखें गए थे। पुलिस की तरफ से बताया गया कि किसी भी तरह की दुर्घटना नहीं घटी। सोनामुखी गोस्वामी पाड़ा कार्तिक पूजा कमेटी के सदस्य प्रबीर गौस्वामी ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी कार्तिक पूजा और विसर्जन अच्छी तरह से हो गया।

पुलिस और प्रशासन की मदद से लोगों ने धूमधाम से इस उत्सव का आनंद लिया। यहां की रहने वाली वैशाखी भूनी ने कहा कि रिस्तेदारो के साथ उन्होंने इस उत्सव का आनंद लिया। विसर्जन के बाद अब फिर इंतजार है अगले साल की पूजा का।

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